Showing posts with the label DARD BHARI SHAYERIShow all
कई सालों से तामीर हो रहा हूं  में. अब .तैयार हूं मुकम्मल होने को.
*हर बात को खामोशी से मान लेना... ये भी एक अंदाज़ होता है नाराज़गी का साहब*    *दुवा मे याद* *सुप्रभात* har baat ko khamoshi Salman Khan shayeri
कोई भी दर्द इतना बड़ा नहीं जितना दर्द के पीछे की वजह बड़ी होती है ! कोई भी काम इतना बड़ा नहीं जितना काम के पीछे की सोच बड़ी होती है dard bhari shayeri
अहमियत कम हो जाती है रिश्तों की जब गिरने लगते है लोग नज़रों से
 ज़िन्दा ज़मीर लोगों को बे  ज़मीर लोगों ने मार डाला में एक उजाला था मुझे अंधेरों ने मार डाला
DARD BHARI SHAYAERI एक बार फिर हार गए हम अय ज़िन्दगी तुमने मौत से यारी करके बहुत बुरा किया
कोई चांद रख मेरी शाम पर  मेरा दिल जले तेरे नाम पर प्यार की राह में मुझे यूं छोड़ने  वाले जा तुझे माफ किया terenam shayeri
ए दिल तेरा यह दर्द yu कम ना होगा  ए दिल तेरा यह दर्द yu कम ना होगा  अभी और चंद सांसे है बाकी अभी और जख्म लगने हैं बाकीDARD BHARI SHAYERI
खत्म हो गई मेरी दास्तां। अब कहीं नहीं मेरा आशियां! बाजार ए मोहब्बत में लुट गया हूं। अब मौत से है वास्ता जाने जा। SAD SHAYAERI DARDH BHARI
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियाँ ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला DARDH BHARI SHAYEARI
दुआओं में हमने खुशियाँ कब मांगी उम्र भर की सजा थी सितम पे सितम किये जा रहा DRAD BHARI SHAYAERI
सिवाए एक शिकायत के इजहार उसके हर फैसले बहुत कुछ कहना था मगरको शायद यहीं मंजूर है DARD BHARI SAHYERI
मैं क्या चाहता हूँ , मैं क्या सोचता हूँ , कभी मुझ से मिरा ख़्याल पूछ लेते .. नहीं दस्तियाब तुम्हारी चाहत मगर , मैं ज़िंदा हूँ कैसे , ये कमाल पूछ लेते SAD SHAYEARI
क्या होता अगरचे मेरा हाल पूछ लेते  दो - चार मोहब्बत से सवाल पूछ लेते मैं अपना हर दुःख तुम को बताता , इक बार अगर तुम मलाल पूछ लेते SAD SHAYERI
जीवन में किसी भी इंसान के साथ भावनाओं में बहने से बेहतर है एक बार उसे परख लेना चाहिए अन्यथा बाद में पछवाता ही होता रहेगा SAD SHAYEARI
MATALBI LOG SHAYAERI वक़्त नहीं है , सब कहते हैं मगर अपने मतलब का वक़्त , सब निकाल लेते है
आप हमें भूल जाओ हमें कोई गम नहीं आप हमें भूल जाओ हमें कोई गम नहीं भुलाना ही था मुझको तो नफरत का सहारा क्यूँ, SAD SHAYERI HINDI
कौन कहता है कोई हमें याद नहीं करता  , याद ज़रूर करते है कोई तारीफ करके तो कोई गीबत करके !
गमों के साए गमों के साए दिन ब दिन मंडराते ही जा रहे है आहिस्ता आहिस्ता हम भी गमों मे जिना सीखते जा रहे है । गमों के साए में जीते लम्बी मुद्दत गुज़र चुकी है अब रहमतों के साए में जीने का हमें भी इंतज़ार है - DARD SHAYERI