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कई सालों से तामीर हो रहा हूं  में. अब .तैयार हूं मुकम्मल होने को.
*हर बात को खामोशी से मान लेना... ये भी एक अंदाज़ होता है नाराज़गी का साहब*    *दुवा मे याद* *सुप्रभात* har baat ko khamoshi Salman Khan shayeri
कोई भी दर्द इतना बड़ा नहीं जितना दर्द के पीछे की वजह बड़ी होती है ! कोई भी काम इतना बड़ा नहीं जितना काम के पीछे की सोच बड़ी होती है dard bhari shayeri
अहमियत कम हो जाती है रिश्तों की जब गिरने लगते है लोग नज़रों से
 ज़िन्दा ज़मीर लोगों को बे  ज़मीर लोगों ने मार डाला में एक उजाला था मुझे अंधेरों ने मार डाला
DARD BHARI SHAYAERI एक बार फिर हार गए हम अय ज़िन्दगी तुमने मौत से यारी करके बहुत बुरा किया