कई सालों से तामीर हो रहा हूं रफ़ी में. अब .तैयार हूं मुकम्मल होने को. M.k
Read more*हर बात को खामोशी से मान लेना... ये भी एक अंदाज़ होता है नाराज़गी का साहब* …
Read moreकोई भी दर्द इतना बड़ा नहीं जितना दर्द के पीछे की वजह बड़ी होती है ! कोई भी काम …
Read moreअहमियत कम हो जाती है रिश्तों की जब गिरने लगते है लोग नज़रों से Ahemiyat kam h…
Read moreज़िन्दा ज़मीर लोगों को बे ज़मीर लोगों ने मार डाला में एक उजाला था मुझे अंधेरों…
Read moreDARD BHARI SHAYAERI एक बार फिर हार गए हम अय ज़िन्दगी तुमने मौत से यारी करके ब…
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