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ज़लील आदमी को इज्ज़त देना इतना आसान नही है !   इसके लिए खुद को ज़लील होना पड़ता हैattitude shayari
कोशिश सिर्फ इतनी सी है की कोई हमसे नाराज ना हो ... बाकी नजर अंदाज़ करने बालो से तो नजरे हम भी नहीं मिलाते
हर किसीको ताना देने की हमारी आदत ही नहीं है हां जो ओकात भुल जाते हैं उनको याद दिला देते है
रद्दी तक तौली जाती है तराज़ू में बिकने से पहले। हमें कोई परख रहा है, तो इसमें बुरा क्या है
आप बीती लिखते है हम किसी के किस्से कहानियां लिखने की आदत नहीं हमें खुद के जज्बात
जब सुबह होगी तब देखा जाएगा अभी रात है अंधेरों को छाने दो जब निकलेगा सूरज तब देखा जाएगा